Thursday, May 28, 2015

Makaan!

समा जाऊ
तेरे बिना
तुझ मे
कैसे!

रूह बनू
तेरे बिना
तेरी
कैसे!

रिश्ता
तेरे बिना
तुझ से
कैसे!

टूटे तू
कीमत बढ़े
किसकी
कैसे!

पैसे!
पैसे!
पैसे!

Thursday, May 21, 2015

Love. Life.


चले तो थे चाँद तक… 
ना रिलेशन ना शिप… 

सर्र्र्र्र धाय् घर्र्र्र्र जाय 
गड़बड़ धड़धड़ लतपत खटपट 

गिर गये फिर चाँद तक!
ना रिलेशन ना शिप!

सुधर गये जब. 
चले तो चाँद तक. 
वरना एक साल तक.

Tuesday, May 19, 2015

Lorn...


तलाश...

नासमझ.

कहो तो बुरी  
कहो तो पूरी
ना कहो तो सही.

तलाश.
सूनेपन की … 

Monday, March 30, 2015

I'm afraid you won't be afraid...


बह गए थोड़े थोड़े
तेरे सोने के आँसू

बहते ही रहे
मेरे सोने के आँसू

दिखता हैं डर मेरे आँखो में
देखती नही हैं तू

डर!
कौनसा डर!
डर के आगे जीत हैं!

Existential crisis!


Existential crisis!
अस्तित्व से पंगा!

दो बड़े राक्षस!
लो बड़े राक्षस!
क्यूँ , कौन!

न मैं आधी
न कविता पूरी
हर लमहा नंगा

Existential crisis
अस्तित्व से पंगा

Ego


बड़े पेड़ की छाया

खुश हो जाओ
धूप नहीं हैं यहाँ

या फिर…

दुखी हो जाओ
धूप नही हैं यहाँ

याद रहे,
तुम खुद भी तो बड़ा पेड़ बन सकते हो!

Chaos


जो कहा
वो कहा?
कहा क्या कहा क्या!
क्या कहा?

कहा तक?
राई से पहाड़ तक।
हौज़ से बूँद तक।

समझ से पार।
न जाओ यार।